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रविवार, 11 अगस्त 2019

भारत में राजनैतिक पार्टी एवं उनकी भूमिका

भारत में राजनैतिक पार्टी एवं उनकी भूमिका 
  • राजनितिक पार्टी  का आशय ऐसे संगठित मानव समुदाय से है जो समान राजनितिक व आर्थिक विचार रखता है।  तथा वैधानिक ढंग से सत्ता प्राप्ति हेतु प्रयासरत हो। 
  • राजनितिक दल की विशेषताए 
  • 1. संगठित मानव समुदाय 
  • 2. आर्थिक-राजनितिक सिद्धांतो की एकता 
  • 3. संवैधनिक साधनो में विश्वास 
  • 4. सुनियोजित कार्य प्रद्धति 
  • 5. सत्ता प्राप्ति का लक्ष्य 
  • NOTE : दलीय प्रद्धति का जन्म व्यूरिप्स को माना  जाता है 
  • राजनितिक दल की परिभाषा 
    https://www.gkvidya.site/2019/08/rajnaitik-parti.html
  • ब्राइस के अनुसार - राजनीतिक दल जनतंत्र से कही अधिक  प्राचीन है 
  • बर्क के अनुसार - रकनीतिक दल 'राष्ट्रीय हिट की वृद्धि के लिए संगठित राजनीतिज्ञ समुदाय है 
  • गैटल के अनुसार - राजनीतिक दल न्यूनाधिक संगठित उन नागरिको का समूह होता है, जो राजनीतिक इकाई के रूप में कार्य करते है ओर जिनका उद्देश्य अपने मतदान बल के प्रयोग द्वारा सरकार पर नियंत्रण करना व अपनी सामान्य नीतियों को क्रियान्वित करना है 
  • दलीय प्रणाली के प्रकार - 3 प्रणाली 
  • एक दलीय प्रणाली- रूस, चीन 
  • द्विदलीय प्रणाली- ब्रिटेन तथा अमेरिका 
  • बहुदलीय प्रणाली- भारत, फ्रांस, स्विट्जरलैंड
  • एकदलीय प्रणाली - जिसमे शासन का सूत्र एक ही राजनैतिक दल के हाथो में रहे, विधानमंडल रबड़ के मुहर की तरह कार्य करती है , ओर दल द्वारा प्रस्तुत सभी प्रस्तावों का अनुमोदन कर देती है, भारत की केंद्रीय सरकार में कई दशको तक (1977) एक ही दलइंडियन नेशनल कांग्रेस सत्तारूढ़ रहा , जबकि अन्य राज्यो के स्तर पर अन्य दलो की सरकार थी 
  • द्विदलीय प्रणाली - ब्रिटेन तथा अमेरिका इस प्रणाली का सर्वोत्तम उदाहरण है संसदीय प्रणाली द्विदलीय प्रणाली के लिए सर्वोत्तम होती है 
  • भारत में राजनैतिक पार्टी एवं उनकी भूमिका 
  • बहुदलीय प्रणाली - जिस देश में दो या दो से अधिक राजनितिक दल हो लेकिन किसी को स्पष्ट बहुमत प्राप्त नहीं होता है  जैसे भारत, फ़्रांस, स्विट्जरलैंड। 
  • लोकतंत्र में राजनितिक दलों की भूमिका 
  • अध्यक्षात्मक शासन प्रणाली की अपेक्षा संसदीय शासन प्रणाली में राजनितिक दलों की भूमिका अधिक होती है संसदीय शासन प्रणाली में दल  अनेक महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करते है 
  • 1. लोकमत का निर्माण करते है 
  • 2. जनता को राजनितिक प्रशिक्षण देते है 
  • ३. निर्वाचन सम्बन्धी कार्य करते है 
  • 4. वे सत्तारूढ़ दल तथा विरोधी दल के रूप में कार्य करते है 
  • 5. दल जनता और सरकार के बीच की कड़ी का कार्य करते है 
  • 6. वे सामाजिक शिक्षा, संस्कृति आदि के क्षेत्र में कार्य करते है 
  • 7. वे किसी देश में क्रांति को रोकते है 
  • आधारभूत प्रश्नो पर लोकमत तैयार करने में वहां भी राजनितिक दल महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है 
  • राष्ट्रिय दल का दर्जा हासिल करने के लिए तीन शर्ते 
  • 1 चार अथवा अधिक राज्यों में कुछ डेल गए वैध मतों का 6% प्राप्त करना जरूरी है लोकसभा व राजयसभा दोनों 
  • 2. किसी एक राज्य में अथवा राज्यों से विधानसभा की कम से कम 4 सीटे जितनी होगी 
  • 3 लोकसभा में 2% सीट हो, और कम से कम तीन विभिन्न राज्यों से हासिल की गयी हो 
  • NOTE : सन अक्टूबर 2015  के आकड़ो के अनुसार भारत में 6 राष्ट्रीय दल तथा 63 राज्य स्तरीय मान्यता प्राप्त है 
  • राष्ट्रीय राजनितिक दल - भारत संभवत : विश्व का सर्वाधिक राजनैतिक दलों वाला देश है , वर्तमान में 7  राजनैतिक दलों को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिला हुआ है 
  • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस - दुनिया के सबसे पुराने दलों में से एक है 1885 में जवाहर लाल नेहरू की अगुवाई में इस दल ने भारत को एक आधुनिक धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य बनाएका प्रयास किया। 1971 तक लगातार और फिर 1980  से 1989  तक शासन किया।  यह पार्टी नयी आर्थिक नीतियों का समर्थक है 
  • भारतीय जनता पार्टी - पुराने भारतीय जनसंघ को पुनर्जीवित करके 1980 में यह पार्टी बनी, भारत की प्राचीन संस्कृति और मूल्यों से प्रेरणा लेकर मजबूत और आधुनिक भारत बनाने का लक्ष्य, भारतीय राष्ट्रवाद और राजनीति की इसकी अवधारणा  सांस्कृतिक राष्ट्रवाद(या हिंदुत्व)एक प्रमुख तत्व है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के नेता की हैसियत से यह पार्टी 1998 में सत्ता में आई। पार्टी जम्मू और कश्मीर को क्षेत्रीय और राजनीतिक स्तर पर विशेष दर्जा देने के खिलाफ है भारत में राजनैतिक पार्टी एवं उनकी भूमिका 
  • बहुजन समाज पार्टी - स्व. काशीराम के नेतृत्व में 1984 में गठन।  पार्टी साहू महाराज, महात्मा फुले, पेरियार रामास्वामी नायकर और बाबा साहब अम्बेडकर के विचरो और शिक्षाओं से प्रेरणा लेती है। दलितों, कमजोर वर्ग के कल्याण, उनके हितो की रक्षा के मुद्दों पर सबसे ज्यादा सक्रिय इस पार्टी का मुख्य आधार उत्तरप्रदेश है 
  • भारतीय कम्युनिष्ट पार्टी मार्क्सवादी (सीपीआई. एम )  -1964 में स्थापित, मार्क्सवाद लेनिनवाद में आस्था।  समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र की समर्थक तथा साम्राजयवाद और साम्प्रदायिकता की विरोधी। पश्चिम बंगाल केरल त्रिपुरा में बहुत मजबूत आधार, यह पार्टी भारत में सामाजिक आर्थिक न्याय का लक्ष्य साधनो में लोकतांत्रिक चुनावो को सहायक और उपयोगी मानती है 
  • भारतीय कम्युनिष्ट पार्टी (सीपीआई ) - 1925 में गठित।  मार्क्सवाद - लेनिनवाद,धर्मनिरपेक्ष और लोकतंत्र में आस्था।  अलगाववादी और साम्प्रदायिक ताकतों की विरोधी। 
  • राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एन सीपी) - कांग्रेस पार्टी के विभाजन के बाद 1999 में यह पार्टी बनी गाँधीवादी, संघवाद में आस्था, यह पार्टी सरकार के प्रमुख पदों को सिर्फ भारत में जन्मे नागरिको के लिए आरक्षित करना चाहती है, महाराष्ट्र के बाद मेघालय मणिपुर असम में भी सक्रिय है 
  • ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस - ममता बनर्जी समर्थित तृणमूल कांग्रेस को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिला है इसका गठन 1998 में किया गया 
  • NOTE : दलबदल निरोधक अधिनियम 30 मार्च 1985 को पारित हुआ 

शनिवार, 10 अगस्त 2019

संघवाद : केंद्र राज्य संबंध Federalism एक नजर

संघवाद 
  • Federation शब्द लैटिन भाषा के फोड़ाईस  (Foedus) से बना है जिसका अर्थ है संधि या  समझौता
  • भारतीय संविधान में Federation शब्द का उल्लेख न कर 'राज्यों का संघ' (Union of states) वाक्यांश का उल्लेख किया गया है 
  •          भारतीय संघ, राज्यों के "पारम्परिक समझौते " का परिणाम नहीं है 
  •          किसी भी राज्य को संघ से अलग होने का अधिकार नहीं है 
  • भारतीय संघीय व्यवस्था का स्वरूप - प्रो. एलेक्जेंड्रोविच- सच्चा संघ, के. सी. व्हीयर - अर्द्ध संघ, मौरिस जोन्स - सौदेबाजी 
  • ए. एच. बिर्च एवम ग्रेनविल आस्टिन- सहयोगी संघवाद, प्रो.पायली 'संविधान का ढांचा संघात्मक, किन्तु उसकी आत्मा एकात्मक । भारतीय संघीय व्यवस्था कनाडा से प्रभावित हैhttps://www.gkvidya.site/2019/08/sanghvad.kendra.rajya-sambandh.html
     
भारत मे सहयोगी संघवाद
  • सर्वप्रथम ए एच बिर्च ने अपनी पुस्तक 'फेडरेलिज फाइनेंस एंड सोशल लेजिसलेशन' में एक प्रतियोगी तथा सहयोगी संघवाद की संकल्पना प्रस्तुत की ओर भारतीय संघ को सहयोगी संघवाद की संज्ञा दी है 
  • सहयोगी संघवाद से तात्पर्य है कि भारत का संविधान केंद्र एवं राज्यो के परस्पर सहयोग पर बल देता है 
  • भारत की राजनीतिक प्रणाली को सहयोगी संघ का स्वरूप प्रदान करने में संवैधानिक संस्थाओं द्वारा सहयोग ।
  •     1. योजना आयोग एवम राष्ट्रीय विकास परिषद 
  •     2. वित्त आयोग
  •     3. अन्तर्राज्यीय परिषद 
  •     4. क्षेत्रीय परिषद 
  •     5. अखिल भारतीय सेवाए
  •     6. विश्व विद्यालय अनुदान आयोग 
  •     7. विभिन्न सम्मेलन (जैसे मुख्यमंत्री, वित्त मंत्री, कृषि मंत्री सम्मलेन)
केन्द्र राज्य सम्बन्ध
  • संविधान के भाग 11 में अनुच्छेद 245 से 263 तक केंद्र- राज्य सम्बन्धों की चर्चा की गई है 
  • संविधान के आधार पर केन्द्र राज्य सम्बन्धो को तीन भागों में विभाजित किया है 
  • 1. विधायी सम्बन्ध (अनुच्छेद 245 से 255)
  • 2. प्रशासनिक सम्बन्ध ( अनुच्छेद 256 से 263)
  • 3. वित्तीय सम्बन्ध ( अनुच्छेद 268 से 293)
विधायी सम्बन्ध
  • भाग 11 में अनुच्छेद 245 से 255 केन्द्र ओर राज्य के बीच विधायी सम्बन्धो के विभिन्न पहलुओं का आदान-प्रदान किया जाता है 
  • केन्द्र राज्यो के विधायी सम्बन्धो का संचालन तीन सूचियों के आधार पर होता है  संघ सूची, राज्य सूची, समवर्ती सूची । इन सूचियों को 7 अनुसूची में रखा गया है 
  • संघ सूची - वर्तमान में  इस सूची में 100 विषय शामिल है, विदेशी मामले , रक्षा, रेलवे, डाक सेवा, बैकिंग, परमाणु ऊर्जा, संचार, मुद्र आदि विषय 
  • राज्य सूची - वर्तमान में राज्य सूची के अन्तर्गत 61 विषय शामिल है, पुलिस, सार्वजनिक व्यवस्था, परिवहन, स्वास्थ्य, कृषि, स्थानीय सरकार,पेयजल की सुविधा, साफ-सफाई आदि 
  • समवर्ती सूची - वर्तमान में 52 विषय शामिल है, शिक्षा, वन, जंगली जानवर, और पक्षियों की रक्षा,बीजली, श्रम कल्याण, आपराधिक कानून और प्रक्रिया, सिविल प्रक्रिया जनसंख्या नियंत्रण और परिवार नियोजन, दवा आदि 
  • अनुच्छेद 245 - अपनी कार्यकारी शक्तियों के प्रयोग से सम्बंधित कुछ मामलो में राज्यों को दिशा-निर्देश देने के लिए केंद्र को शक्तिया प्रदान करता है 
  • अनुच्छेद 249 - राष्ट्रीय हित में राज्य सूचि में एक विषय के सम्बन्ध में कानून बनाने के लिए संसद को शक्तिया प्रदान करता है 
  • अनुच्छेद 250  - के तहत संसद जब राष्ट्रीय आपात स्थिति (अनुच्छेद 352 ) होती है तो संसद के हाथो में राज्य से सम्बंधित मामलो पर कानून बनाने की शक्तिया आ जाती है 
प्रशासनिक सम्बन्ध 
  • अनुच्छेद 256से 263 का सम्बन्ध केंद्र और राज्य के बीच प्रशासनिक सम्बन्धो के आदान प्रदान से है 
  • NOTE :  अनुच्छेद 73 - केंद्र की प्रशासनिक शक्ति का विस्तार उन विषयो तक है, जिन पर संसद को कानून बनाने का अधिकार है 
  • अनुच्छेद 162 - राज्यों की प्रशासनिक शक्ति का विस्तार उन विषयो तक है, जिन पर संससद को कानून बनाने का अधिकार है 
राज्यों पर केंद्र के प्रशसकीय नियंत्रण की विधिया 
  • अनुच्छेद 256  - केंद्र राज्यों को यह निर्देश  सकता है की उन्हें अपनी प्रशानिक शक्ति का प्रयोग किस प्रकार करना चाहिए 
  • अनुच्छेद 257 - राज्यों को अपनी  प्रशासनिक शक्ति का प्रयोग इस प्रकार करना है संसद द्वारा निर्मित कानूनों का पालन होता है 
  • अनुच्छेद 258 - राष्ट्रपति राज्यों की सरकारों अथवा उसके पदाधिकारियों को ' एजेंट के रूप में कोई भी कृत्य सोप सकता है 
  • अनुच्छेद 261 - यदि केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों का यह कर्तव्य कि वे सभी सरकारी कृत्यों का आदर करे एवं न्यायालयों के निर्देश को लागु करे 
  • NOTE : अनुच्छेद 365 - यदि केंद्र के निर्देशों का पालन राज्य नहीं करता है तो संवैधानिक तंत्र की विफलता के आधार पर उस राज्य में राष्ट्रपति शासन लागु किया जाता है 
  • अखिल भारतीय सेवाओं एवं राजयपाल के माध्यम से भी केंद्र राज्यों पर नियंत्रण रखता है 
केंद्र की राज्यों के बीच समन्वयकर्ता की भूमिका 
  • अनुच्छेद 262 - संसद अन्तर्राज्यीय नदियों के बटवारे से उत्पन्न विवादों को सुलझाने के लिए कानून बना सकती है 
  • अनुच्छेद 263 - राष्ट्रपति राज्यों  पारस्परिक विवादों की जाँच एवं समाधान के लिए अन्तर्राज्यीय परिषद का गठन कर सकता है (स्थापना 28 मई 1990 )
वित्तीय सम्बन्ध 
  • संविधान के भाग 12  में अनुच्छेद 268से 293 तक केंद्र और राज्य वित्तीय सम्बन्धो की चर्चा की गई है 
  • केंद्र सरकार के प्रमुख राजस्व स्रोत - निगम कर, सीमा शुल्क, निर्यात शुल्क, कृषि भूमि को छोड़कर अन्य सम्पत्ति पर सम्पदा शुल्क, विदेशी ऋण, रेल, रिजर्वबैंक, शेयर बाजार, आदि 
  • राज्यों के राजस्व - प्रति व्यक्ति कर, कृषि भूमि कर, बीजली के उपयोग एवं विक्रय पर कर आदि 
  • केंद्र द्वारा लगाए गए, वसूले गए विनियोजित कर - निगम कर 
  • केंद्र द्वारा लगाए, वसूले गए किन्तु राज्यों को सौंपे जाने वाले कर -  वस्तुओ के क्रय विक्रय पर कर, रेल किराया तथा भाड़ो पर कर 
  • केंद्र द्वारा लगाए किन्तु राज्य द्वारा वसूले गए एवं विनियोजित कर- स्टाम्प शुल्क 
  • केंद्र द्वारा लगाया गए, वसूले गए तथा केंद्र राज्यों के बीच वितर्क किया जाने वाला कर - आय कर 
  • NOTE : अनुच्छेद 280 - अर्द्ध न्यायिक निकाय के रूप में वित्त आयोग की व्यवस्था करता है, इसका गठन हर 5 वर्ष में राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है 
  • 14 वें वित्त आयोग के अध्यक्ष वाई वी रेड्ड़ी है 
  • 15 वें वित्त आयोग के अध्यक्ष एन के सिंह है 
केंद्र राज्य सम्बन्धो में सुधार हेतु प्रयास 
  • प्रशासनिक सुधार आयोग - केंद्र सरकार ने मोरारजी देसाई की अध्यक्षता में 1966 में प्रशासनिक सुधार आयोग (एआर सी ) का गठन किया, 22 सिफारिशें है ांविधान के अनुच्छेद 263  के तहत एक अंतराज्यीय परिषद का गठन किया जाए 
  • राजमन्नार समिति - इस समिति ने 1971 में तमिलनाडु सरकार को अपना प्रतिवेदन सौंपा , सिफारिश, अखिल भारतीय सेवाओं को समाप्त कर दिया जाए 
  • सरकारिया आयोग - 1983 में केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत न्यायाधीश आर. एस. सरकारिया की अध्यक्षता में केंद्र राज्य सम्बन्धो पर तीन सदस्यीय आयोग का गठन किया गया ,आयोग ने अंतिम रिपोर्ट अक्टूबर 1987  में पेश की 
  • एक स्थायी अंतर्राज्यीय परिषद हो जिसे अंतर् सरकारी परिषद कहा जाना चाहिए। इसकी स्थापना अनुच्छेद 263  के तहत होनी चाहिए 
  • अनुच्छेद 356(राष्ट्रपति शासन) को बहुत संभलकर इस्तेमाल किया जाए 
  • योजना आयोग और वित्त आयोग के बीच कार्यो का वर्तमान बटवारा उचित व निरंतर होना चाहिए 
  • त्रिभाषा फॉर्मूला समान रूप से लागु करने की डिश में कदम उठाना चाहिए 

गुरुवार, 8 अगस्त 2019

भारतीय नागरिको के मौलिक अधिकार एक नजर

मौलिक अधिकार 
  • मौलिक अधिकार को संविधान का 'मैग्नाकार्टा'  कहा जाता है, ये विधायिका और कार्यपालिका की शक्तियों को मर्यादित करते है | 
  • भारतीय संविधन का अनुच्छेद 12 से 35 भारतीय नागरिको को मौलिक अधिकार प्रदान करता है | 
  • यदि किसी नागरिक के मौलिक अधिकार का हनन होता है, तो वह न्यायालय की शरण ले सकता है | 
  • सम्पति का अधिकार को 44 वें संविधान संशोधन (1978) के द्वारा निरसित किया गया है | 
  • NOTE : 1931 में कराची अधिवेशन (अध्यक्ष सरदार वल्लभभाई पटेल) में कांग्रेस ने घोषणा पत्र में मूल अधिकार की मांग की | मूल अधिकार का प्रारूप जवाहर लाल नेहरू ने बनाया था | 
    https://gkave.blogspot.com/2019/08/maulik-adhikar.html
मौलिक अधिकार के प्रकार 
  • वर्तमान में भारतीय नागरिको को निम्लिखित छः प्रकार के मौलिक अधिकार प्राप्त है 
  • समता का अधिकार/समानता का अधिकार    - भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 से 18 के अंतर्गत भारतीय नागरिको को समता/समानता का अधिकार प्राप्त है, इसे संयुक्त राज्य अमेरिका से लिया गया है इसका वर्णन संविधान के भांग 3  में किया ह्या है 
  • अनुच्छेद 14 -विधि के समक्ष समता - के तहत भारत के नागरिको को विधि के समक्ष समान अधिकार  तथा  समान रूप से उसे लागु भी करेगा | 
  • अनुच्छेद 15 - के तहत किसी भी भारतीय नागरिको को राज्य धर्म, जाति,नस्ल, लिंग या जन्म के आधार पर भेदभाव नहीं करेगा | 
  • अनुच्छेद 16 -के तहत  भारत के सभी नागरिको को राज्य के अधीन किसी भी पद पर नियुक्ति के लिए उपलब्ध समान अवसर की प्राप्ति का अधिकार होगा |
  • अनुच्छेद 17 -अस्पृश्यता का अंत -यदि कोई इसे अपने जीवन में अपनाता है या ऐसी भावना प्रकट है, तो उसे दंडनीय अपराध घोषित किया गया है 
  • अनुच्छेद 18 -उपाधि का अंत -सेना या विधि सम्बन्धि सम्मान के सिवाय अन्य कोई भी उपाधि राज्य द्वारा प्रदान नही की जाएगी | भारत क कोई नागरिक किसी अन्य देश से बिना राष्ट्रपति की आज्ञा के कोई उपाधि स्वीकार नहीं कर सकता है
  • स्वतंत्रता का अधिकार    -भारतीय  संविधान के अनुच्छेद 19 से 22 भारतीयो के लिए स्वतंत्रता का अधिकार का प्रावधान है 
  • अनुच्छेद 19 -विचार अभिव्यक्ति -सभी नागरिको को विविध प्रकार की विचर की स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करता है जो क्रमवार है |        
  •               19 (A) विचार अभिव्यक्ति, प्रेस की स्वतंत्रता, सुचना पाने की स्वतंत्रता
  •               19 (B) शांतिपूर्ण बिना शस्त्र के एकग्रित होने की और सभा या सम्मेलन करने की स्वतंत्रता | 
  •               19 (C) संघ बनाने की स्वतंत्रता | 
  •               19 (D) आवागमन की स्वतंत्रता (देश में कहि भी ) | 
  •               19 (E)  निवास की स्वतंत्रता | 
  •               19 (F)  व्यापार व्यवसाय, रोजगार की स्वतंत्रता | 
  • अनुच्छेद 20 - अपराध के दोष सिद्धि के सम्बन्ध -
  •              ( i ) एक अपराध के लिए सिर्फ एक सजा | 
  •              (ii ) तत्कालीन क़ानूनी उपबंध  मिलेगी | 
  •              (iii )स्वयं के विरुद्ध गवाही देने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा | 
  • अनुच्छेद 21 -जीवन एवं शारीरिक स्वतंत्रता का संरक्षण -
  •              21 (क) 6 से 14 वर्ष के बच्चो को नि:शुल्क  एवं अनिवार्य शिक्षा ( 86 वें संविधान संशोधन 2002)
  • अनुच्छेद 22 - गिरफ्तारी और निरोध में संरक्षण -
  •               (i) हिरासत में लेने से पहले उसे कारण बताना होगा | 
  •               (ii)24 घण्टे के अन्दर अपराधी को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना | 
  •               (iii )पसन्द के अधिवक्ता से सलाह लेने का अधिकार | 
  • शोषण के विरुद्ध अधिकार   - भारतीय संविधान के अनुच्छेद 23 से 24 भारतीय नागरिको को शोषण के विरुद्ध अधिकार प्राप्त है 
  • अनुच्छेद 23 -दुर्व्यापार और बलात श्रम  प्रतिषेध | 
  • अनुच्छेद 24 -14 वर्ष से कम आयु वाले किसी बच्चे को कारखानों, खनन क्षेत्रों या अन्य किसी भी प्रकार के जोखिम बजरे कार्य पर नियुक्त करना दण्डनीय अपराध है | 
  • धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार -भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 से 28 धार्मिक स्वतंत्रता का प्रावधान है | 
  • अनुच्छेद 25 - भारतीय नागरिको को धरण को मानने तथा उसका प्रचार-प्रसार करने की स्वतंत्रता | 
  • अनुच्छेद 26  -अपने धर्म के लिए संस्थाओ की स्थापना करने, संचालन करने,सम्पत्ति अर्जन करने, स्वामित्व रखने तथा नियंत्रण का अधिकार | 
  • अनुच्छेद 27  -जिसकी आय, किसी भी धर्म या धार्मिक सम्प्रदाय की प्रगति में व्यय के लिए निश्चित कर दी, ऐसे उसे बाध्य  नहीं किया जाएगा | 
  • अनुच्छेद 28  -राज्य-विधि से पूर्व रुप से संचालित कसी शिक्षण  संस्थान में कोई धार्मिक शिक्षा नहीं दी जाएगी | किसी धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेने या किसी धर्मोपदेश को बलपुरक सुनने के लिए बाध्य नहीं करेगा | 
  • संस्कृति और शिक्षा सम्बन्धि  अधिकार -भारतीय संविधान के अनुच्छेद 29 और 30 भारतीय नागरिको के लिए संस्कृति एवं शिक्षा संबंधी अधिकार 
  • अनुच्छेद 29 -(१)नागरिको को अपनी भाषा लिपि एवं संस्कृति बनाए रखने का अधिकार है | 
  • अनुच्छेद 29 -(२)भाषा, जाति, धर्म, और संस्कृति के आधार पर किसी भी नागरिक को सरकारी शैक्षिक संस्था में प्रवेश से रोका नहीं जा सकता है | 
  • अनुच्छेद 30 -अल्पसंख्यक को अपने शिक्षण संस्थाओ की स्थापना एवं संचालन का अधिकार 
  • संवैधानिक उपचारो  का अधिकार  
  • डॉ. अम्बेडकर  मान्यता थी कि अनुच्छेद 32  सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्रावधान है, इसके बिना संविधान अधूरा है, संवैधानिक उपचारो का अधिकार 'संविधान की आत्मा' एवं हृदय है | 
  • यदि किसी नागरिक के मौलिक अधिकारों का हनन होता है तो वह सर्वोच्च न्यायालय (अनुच्छेद 32) तथा उच्च न्यायालय (अनुच्छेद 226 ) अपील कर सकता है | 
  • सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालय को नागरिको के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए 'रिट' याचिका जारी करने का अधिकार प्राप्त है  
याचिकाए 
  • बन्दी प्रत्यक्षीकरण -बन्दी बनाए गए व्यक्ति को 24 घण्टे के अंदर न्यायालय में पेश करे, और नहीं करने पर सम्बन्धित पुलिस अधिकारी को यह लेख जारी किया जाता है 
  • परमादेश - अर्थ -हम आदेश देते है ' सार्वजनिक संस्था या पदाधिकारी अपने दायित्व  का निर्वहन नहीं करे तो उसे परमादेश लेख जारी किया जाता है
  • प्रतिषेध -अर्थ -रोकना - यह आदेश अधीनस्थ न्यायालय को अपने न्याय क्षेत्र से बाहर कार्यो को रोकने के लिए जारी किया जाता है 
  • उत्प्रेषण -यह लेख उच्चतम न्यायालय द्वारा अधीनस्थ न्यायालयों को क्षेत्राधिकार से बाहरो के मामलो को अपने पास मंगवाने के लिए जारी किया जाता है 
  • अधिकार पृच्छा - अनधिकृत व्यक्ति को पद से हटाने के लिए यह लेख जारी किया जाता है 
  • NOTE : भारतीय संविधान का अनुच्छेद 32  संविधान का आधार-भूत लक्षण है, संविधान में संशोधित कर इसे निरसित/ परिवर्तित नहीं किया जा सकता है 

भारत का संविधान

https://gkave.blogspot.com/2019/08/blog-post_3.html


संविधान सभा




*भारत का संविधान, 'लिखित और मौलिक दस्तावेज होता है, जिसके आधार पर किसी देश की शासन व्यवस्था संचालित की जाती है , विश्व में संविधान सभा का विचार देने वाला व्यक्ति ब्रिटेन का राजनितिक विचारक सर हेनरी मेंन था|




*विश्व में सर्वप्रथम संविधान सभा सन 1787 में अमेरिका के फिलाडेल्फिया में बनाई गयी| जंहा 13 राज्यों के प्रतिनिधि ने मिलकर अमेरिका का संविधान तैयार किया था भारत में संविधान सभा का सर्वप्रथम विचार सन 1895 में स्वराज्य विधेयक में व्यक्त हुआ | जिसे तिलक के निर्देशन में तैयार किया गया |




*सन 1928 में मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में संविधान का प्रारूप तैयार किया गया , यह नेहरू प्रतिवेदन के रूप में लोकप्रिय हुआ | अगस्त 1940 में वायसराय लार्ड लिनलिथगो द्वारा प्रस्तुत अगस्त प्रस्ताव में व्रिटिश सरकार की और से पहली बार संविधान सभा की बात को स्वीकार किया | भारतीय राष्टीय कांग्रेस ने अगस्त प्रस्तावों को अस्वीकार कर दिया था




सन 1942 में क्रिप्स प्रस्तावों में भी इसे दोहराया गया | कांग्रेस ने क्रिप्स प्रस्तावों को अस्वीकार कर दिया | गाँधीजी के अनुसार "क्रिप्स प्रस्ताव दिवालिया बैंक के नाम भविष्य की तिथि में भुनाया जाने वाला चैक है




सन 1946 में केबिनेट मिशन योजना भारतीय संविधान सभा के प्रस्तावों को स्वीकार कर इसे व्यवहारिक रूप दिया गया




*भारतीय संविधान का निर्माण करने वाली संविधान सभा का गठन जुलाई 1946 में (कैबिनेट मिशन की संस्तुतियों पर) किया गया




*भारतीय संविधान विश्व का सबसे विशाल संविधान है जिसके निर्माण 2 वर्ष 11 माह और 18 दिन का समय लगा था




*भारतीय संविधान में 395 अनुच्छेद, 22 भाग ,और 8 अनुसूचियाँ थी (वर्तमान में 12 अनुसुचिया है *भारत के पहले शिक्षा मंत्री सी. राजगोपालाचारी थे




*संविधान का प्रथम अधिवेशन 9 दिसंबर 1946 को सम्पन हुआ, डॉ सच्चिदानन्द सिन्हा ने संविधान सभा के प्रथम अधिवेशन की अध्यक्षता की, जो अस्थायी थे |




*11 दिसंबर 1946 को डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को संविधान का स्थयी अध्यक्ष चुना गया |




*पण्डित जवाहर लाल नेहरू ने संविधान सभा के समक्ष 'उद्देश्य प्रस्ताव' 13 दिसंबर 1946 को प्रस्तुत किया, जो भारतीय संविधान की नीव थी|




*उद्देश्य प्रस्ताव को संविधान के रूप में परिष्कृत करने के लिए विभिन्न विषयो से संबंधित समितियों का गठन किया गया, जिनमे सबसे प्रमुख डॉ.भीमराव अम्बेडकर की अध्यक्षता बनी सात सदस्यों वाली प्रारूप समिति थी |




संविधान की अंतिम बैठक 24 जनवरी 1950 को हुई और इसी दिन संविधान सभा द्वारा डॉ.राजेंद्र प्रसाद को भारत का प्रथम राष्ट्रपति चुना गया




26 नवम्बर ,1949 को संविधान अंगीकृत किया गया था, जिस पर 284 सदस्यों के हस्ताक्षर किए थे | 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान लागु किया गया, क्योकि सन 1930 से ही 26 जनवरी का दिन सम्पूर्ण भारत में स्वाधीनता के रूप में मनाया जाता है | 26 जनवरी 1950 को प्रथम गणतंत्र दिवस मनाया गया




प्रमुख संविधान समिति 




क्रम   संख्या  समितियाँ                        अध्यक्ष 
1    प्रारूप समिति                     डॉ.भीमराव अम्बेडकर 
2    कार्य संचालन समिति                के. एम्. मुंशी 
3    संघ संविधान, संध शक्ति समिति      जवाहर लाल नेहरू 
4    मूल अधिकार,अल्प संख्यक प्रान्तीय    सरदार वल्लभभाई पटेल  
    संविधान समिति  
5    प्रक्रिया, वार्ता, तदर्थ झंडा समिति    डॉ. राजेंद्र प्रसाद
6    अल्प संख्यक उपसमिति            एच. सी. मुखर्जी 
7    सदन समिति                    पी.पट्टाभि रमैया 
8    वित्त एवं स्टाफ समिति             ए. एन. सिन्हा 






संविधान सभा की कार्य प्रणाली




ग्रेनविल ऑस्टिन ने अपनी पुस्तक 'इण्डियन कॉन्स्टिट्यूशन कार्नर स्टोन ऑफ़ ए नेशन' में व्यक्त किया की भारत की संविधान का दृष्टिकोण तीन सिद्धांतो पर आधरित था




1.सर्वसम्मतता : सर्वसम्मति से लिए गए निर्णय-संधीय व्यवस्था प्रस्तावना, संसद आदि|




2. समायोजन : दो परस्पर विरोधी समझे जाने वाले सिधान्तो में समन्वय | जैसे संघात्मक एवं एकात्मक तत्वों में समन्वय |




3. परिवर्तन के साथ चयन : जैसे संविधान संशोधन प्रणाली |




NOTE : जेनिंग्स ने संविधान सभा को वकीलों का स्वर्ग कहा है




संविधान के स्रोत




ब्रिटेन : संसदीय शासन, विधि का शासन, कानून निर्माण प्रक्रिया, संसदी विशेषाधिकार |




अमेरिका : मूल अधिकार, न्यायिक पुनरावलोकन, उप-राष्ट्रपति का पद, राष्ट्रपति पर महाभियोग, कानुन का समान संरक्षनण |




आयरलैण्ड : निति निर्देशक तत्व, राष्ट्रपति की निर्वाचन प्रद्धति, राजयसभा में सदस्य मनोनीत |




कनाडा : संधीय व्यवस्था, अवशिष्ट शक्ति केन्द्र में निहित होना |




आस्ट्रेलिया : समवर्ती सूचि, संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक|




जर्मनी : आपातकालीन प्रावधान |




सोवियत संघ : मूल कर्तव्य, प्रस्तावना में न्याय का आदर्श |




फ़्रांस : गणतंत्र, समानता स्वतंत्रता एवं बंधुत्व का आदर्श |




दक्षिण अफ्रीका : संविधान संशोधन प्रक्रिया |




जापान : कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया |

बुधवार, 7 अगस्त 2019

भारत के नागरिकों के मौलिक कर्तव्य एक नजर

मौलिक कर्तव्य 

  • मौलिक कर्तव्य, भारतीय नागरिक के लिए दायित्व प्रस्तुत करते है, देश अपने नागरिको से अपेक्षा करता है कि वे राष्ट्र के लक्ष्यो की प्राप्ति के लिए सक्रीय योगदान दे | 
  • यहाँ संकल्पना पूर्व सोवियत संघ(रूस) से ली गई है | 
  • भारतीय संविधान में मौलिक कर्तव्यों को सरदार स्वर्ण सिंह समिति  शिफारिश पर 42 वें संविधान संशोधन अधिनियम (1976) के तहत समाहित किया गया | संविधान का अनुच्छेद 51(क) मौलिक कर्तव्यों का प्रावधान करता है | 
    https://gkave.blogspot.com/2019/08/molik.kartavya.html
  • भारतीय संविधान में 4 (क) के अनुच्छेद 51(क) के तहत भारतीय नागरिको के लिए 11 मौलिक कर्तव्य निर्धारित किए गए है | (पूर्व में 10 मौलिक कर्तव्यं थे)
  • 1 . संविधान का पालन, राष्ट्रध्वज, राष्ट्रगान का सम्मान किया जाए | 
  • 2 . राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन के आदर्शो को ह्रदय में सजोए रखे | 
  • 3 . देश की सम्प्रभुता, एकता व अखण्डता की रक्षा करे | 
  • 4 . देश की रक्षा व  राष्ट्र की सेवा के लिए तैयार रहे | 
  • 5 . भारत के लोगों में समरसता/ भातृत्व  भावना का विकास करना है | 
  • 6 . सामाजिक सांस्कृतिक परम्परा का विवाह करना है | 
  • 7 . पर्यावरण संरक्षण व संवर्द्धन, तथा उनके प्रति दया रखना | 
  • 8 . वैज्ञानिक दृष्टिकोण,  सुधारवादी दृष्टिकोण का विकास करना है | 
  • 9 . सार्वजनिक सम्पति की रक्षा व हिंसा से दूर रहे | 
  • 10 . राष्ट्र की प्रगति में व्यक्ति या सामूहिक रूप से सभी क्षेत्रों में उत्कर्ष हो | 
  • 11 . प्रारम्भिक शिक्षा परिवार का दायित्व (6 से 14 वर्ष 
  • NOTE :     ↘
  •   यह कर्तव्य 86 वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002  द्वारा भारतीय संविधान में जोड़ा गया | 
राज्यों का पुनर्गठन
  • भाषा के आधार पर 1953  में सर्वप्रथम आंध्रप्रदेश राज्य का गठन किया गया | 
  • फजल अली आयोग की शिफारिश ने राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 के आधार पर 14  राज्यों 6  संघ शासित प्रदेशो का निर्माण हुआ | 
    https://gkave.blogspot.com/2019/08/molik.kartavya.html
  • 01 मई 1960 को महाराष्ट्र एवं गुजरात राज्यों की स्थापना बम्बई राज्य का बटवारा करके किया | 
  • भारत सरकार ने 18 दिसम्बर, 1961  को गोवा, दमन व द्वीव को पुर्तगालियों से मुक्त करवाया, बारहवे संविधान संशोधन में गोवा दमन द्वीव को भारत में मिला दिया 
  • नागा आन्दोलन के कारण 1 दिसम्बर 1963 में नागालैण्ड को असम से अलग कर दिया गया | 
  • नवम्बर,1966 में पंजाब व हरियाणा राज्य बनाया (पंजाब का बटवारा करके)
  • 25 जनवरी, 1971 को हिमाचल प्रदेश व 21 जनवरी 1972 को मणिपुर, त्रिपुरा, एवं मेघालय को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया | 
  • 26 अप्रैल 1975  को सिक्किम राज्य का  गठन किया गया | 
  • 20 फरवरी 1987 मिजोरम व अरुणाचल प्रदेश तथा 30 मई 1987 को गोवा राज्य बनाया गया | 
  • सन 2000 में मध्यप्रदेश से छतीसगढ़, उत्तरप्रदेश से  उत्तरांचल (उत्तराखंड ) तथा बिहार से झारखण्ड अलग करके राज्य बनाए गए | 
  • 2 जून 2014 को आन्ध्रप्रदेश से विभाजित कर तेलंगाना राज्य का गठन कर 29 राज्य बनाये गए, और वह के मुख्यमंत्री चन्द्रशेखर राव थे तथा राजधानी हैदराबाद बनाई गयी | 
NOTE :
  • जम्मू कश्मीर अब राज्य नहीं है  अब इसे केन्द्र शासित प्रदेश बनायातथा जम्मू कश्मीर से अलग करके लद्दाख को भी केन्द्रशासित (दो जिलों वाला प्रदेश)प्रदेश बनाया गया है | 
  • वर्तमान में अब 28 राज्य, 9 केन्द्रशासित प्रदेश है| 
  • जम्मू कश्मीर में 20 जिले तथा लद्दाख में 2 जिले है 
  • जम्मू कश्मीर में विधानसभा की 5 व लद्दाख में 1 सीट निर्धरित की गई 
  • जम्मू कश्मीर में विधान सभा का कार्यकाल 5 वर्ष रखा गया है 
  • जम्मू कश्मीर में 239 A के अन्तर्गत शासन किया जाता है 


मंगलवार, 6 अगस्त 2019

राज्य नीति निर्देशक तत्व व नागरिकता एक नजर

राज्य नीति निर्देशक तत्व 

  • भारतीय संविधान के भाग 4 के अनुच्छेद 36-51 में राज्य के लिए नीति निर्देशक करने वाले तत्वों का उल्लेख किया गया है | 
  • राज्य नीति निर्देशक तत्व की संकल्पना आयरलैण्ड के संविधान से प्रेरित है 
  • अनुच्छेद 38  -लोककल्याण की अभिवृद्धि,सामाजिक व्यवस्था बनाना, सामाजिक, आर्थिक एवं राजनैतिक न्याय प्रदान करता है 
  • अनुच्छेद 40  -ग्राम पंचायत की स्थापना | 
  • अनुच्छेद 42 कामगारों को निर्वाह मजदूरी| 
  • अनुच्छेद 44  - समान सिविल संहिता का निर्माण करे | 
  • अनुच्छेद 45  6 वर्ष की आयु को नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा के अवसर उपलब्ध करवाना है 
  • अनुच्छेद 46  -अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति और अन्य दुर्बल वर्ग को शिक्षित करना, आर्थिक अभिवृद्धि करना राज्य का कर्तव्य है|   
  • अनुच्छेद 48(क) -पर्यावरण का सरक्षण  तथा संवर्द्धन और वन तथा वन्य जीवो की रक्षा | 
  • अनुच्छेद 49  -राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों, स्थानों  व वस्तुओ का सरक्षण | 
  • अनुच्छेद 50  -कार्यपालिका व न्यायपालिका के कार्य क्षेत्र को अलग करता है| 
  • अनुच्छेद 51  -अन्तराष्ट्रीय शान्ति व सुरक्षा बनाए रखने का प्रयत्न करना 
नागरिकता 

  • भारतीय संविधान संघात्मक है | 
  • भारतीय नागरिको को एकल नागरिकता प्राप्त है | 
  • भारतीय नागरिकता, 1955 में नागरिकता प्राप्त हेतु प्रावधान किया गया है 
  • जन्म आधारित -जन्म भारत में 26 जनवरी 1950 के बाद हुआ हो, वह जन्म से भारत का नागरिक होगा | 
  • वंशानुगत अथवा रक्त सम्बन्ध आधरित - जन्म 26 जनवरी 1950 के बाद भारत के बाहर हुआ हो लेकिन जन्म के समय उसका पिता भारत का नागरिक हो, वह भारत का नागरिक होगा| 
  • 1986  में भारतीय नकृक्त अधिनियम, 1956 में संशोधन किया गया है |                                             कोई भी व्यक्ति अब देशीयकरण द्वारा नागरिकता तभी प्राप्त कर सकता है, जब वह कम से कम 10 वर्ष (पहले 5 वर्ष थी) तक भारत में निवास कर चूका हो | 
  • पंजीकरण के माध्यम से जो व्यक्ति भारतीय नागरिकता प्राप्त करना चाहता है,उन्हें अब भारत में कम से कम 5 वर्ष (पूर्व में 6 माह की थी) निवास करना होगा | 

यूरोप महाद्वीप हिन्दी

*यूरोप महाद्वीप हिन्दी*             

https://gkave.blogspot.com/2019/07/blog-post_6.html
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*यूरोप महाद्वीप 46  देशो वाला महाद्वीप 

*यूरोप महाद्वीप के अधिकांश देश तीनो और से सागरों  से घिरे है, जिसके कारण ऐसे प्रायद्वीपो  का महाद्वीप कहते है 

* यूरोप के उत्तेर पश्चिम में एक द्वीप समूह स्थित है जिसे ब्रिटिश द्वीप समूह कहते है 

*                        उत्तरी  ध्रुव सागर 
                                    ⬆                  सर्वोच्च शिखर  

                                                   ⬈ एल्ब्रुश काकेशस 

    अटलाण्टिक ⬅  यूरोप    ➡     एशिया महाद्वीप 
      महासागर                
                                     ⬇
                              भूमध्यसागर 
                              कालासागर 

*रूस विश्व का एकमात्र देश है, जो यूरोप एशिया दोनों महाद्वीपों में विस्तृत है 

*यूरोप महाद्वीप की प्रमुख नदिया डेन्यूब, वोल्गा टेम्स, राइन नीस्टर, सीन, लोरे, मर्सी, आदि 

*यूरोप महाद्वीप का सबसे बड़ा नगर लन्दन टेम्स नदी के किनारे स्थित है 

*डेन्यूब नदी के तट पर बुखारेस्ट, बुडापेस्ट, वियना, ब्रातिस्लावा, बेलग्रेड राजधानिया स्थित है 

*यूरोप की सबसे लम्बी नदी वोल्गा नदी (3690 km )

*इटली विश्व का सर्वाधिक अंगूर तथा जैतून उत्पादित करने वाला देश है

*राइन नदी के व्यापार में कोयले  का महत्व होने के कारण इसे कोयला नदी भी कहते है 

*राइन नदी जलमार्ग यूरोप का सर्वाधिक व्यस्त अन्त: स्थली जलमार्ग है 

*क्षेत्रफल की दृस्टि से विश्व का सर्वाधिक बड़ा देश रूस यूरोप महाद्वीप में स्थित है 

*इंग्लिश चैनल फ़्रांस को युनाइटेड किंगडम से अलग करता है 

* यूराल पर्वत एशिया महाद्वीप को यूरोप से अलग करता है 

*विश्व में सबसे अधिक शेम्पेन शराब फ़्रांस में बनती है 

* फ़्रांस को हाइन यार्ड और नार्वे को फियोर्ड तटों का देश कहते है 

*गल्फस्ट्रीम जलधरा को यूरोप के कम्बल के नाम से जाना है 

*आल्प्स पर्वत का सर्वाधिक विस्तार स्विट्जरलेण्ड  में पाया जाता है 

*पो नदी को इटली की गंगा कहा जाता है 

*इटली और स्विट्जरलेण्ड के बिच ग्रेट सेण्ट बरनार्ड  दर्रा मार्ग प्रदान करता है 

*एन्टवर्प (बेल्जियम) विश्व का हीर व्यापार का सबसे बड़ा केंद्र है 

*ब्रेनर दर्रा इटली एवं आस्ट्रिया के बिच है  

*सेण्ट  जार्ज चैनल आयरलैण्ड और ग्रेट ब्रिटेन के बिच विद्यमान है 

*यूरोप मरुस्थल विहीन प्रदेश है 

*काला सागर और एजियन सागर के बिच मारमारा सागर स्थित है 

*जर्मनी और नीदरलैण्ड  देशो का बन्दरगाह  प्रमुख रूप से रॉटरडम है 

*उत्तरी सागर के डागर बैंक और ग्रेट फिशर बैंक महत्वपूर्ण मत्स्य ग्रहण क्षेत्र है 

*यूरोप का सबसे बड़ा तथा उत्तम लोहा स्वीडन के किरुना से प्राप्त होता है 

सोमवार, 5 अगस्त 2019

प्रस्तावना व प्रमुख सवैधानिक अनुच्छेद


https://gkave.blogspot.com/2019/08/blog-post_72.html

भारतीय संविधान की पस्तावनाभारत के प्रमुख संवैधानिक अनुच्छेद और 
अनुसूचियों को निरुपित किया जाता है 

प्रस्तावना 
  1. प्रस्तावना संविधान के लिए एक परिचय के रूप में है
  2. संविधान की प्रस्तावना को संविधान की कुंजी कहा जाता है | हम भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व-सम्पन्न
  3. हम भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व-सम्पन्न
  4. , समाजवादी पन्थ -निरपेक्ष,
  5. लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नगरिकों को सामाजिक, आर्थिक, और राजनैतिक
  6. के लिए तथा उसके समस्त नगरिकों को सामाजिक, आर्थिक, और राजनैतिक
  7. न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता,
  8. प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त करने के लिए तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और
  9. उन सब में व्यक्ति की गरिमा और
  10. राष्ट्र की एकता और अखण्डता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए
  11. दृढ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवम्बर 1949
  12. (मिति मार्गशीर्ष शुक्ला सप्तमी, संवत दो हजार छह विकर्मी) को एतद द्वारा इस संविधान को अंगीकृत अधिनियमित और आत्मार्पित करते है |
  13. 42 वें संविधन संशोधन (1976) द्वारा इसमें समाजवादी, धर्मनिरपेक्षता
  14. और अखण्डता शब्द जोड़े गए |





भारत के प्रमुख संवैधानिक अनुच्छेद




भाग व अनुच्छेद                           प्रावधान 
 भाग 1 
 अनुच्छेद 1                       संघ का नाम और राज्य क्षेत्र 
 भाग 2 
 अनुच्छेद 5-11                  नागरिकता प्रावधान 
 भाग 3 
 अनुच्छेद 12-35               मौलिक अधिकारों का प्रावधान 
 भाग 4 
 अनुच्छेद 36-51              राज्य के निति निर्देशक तत्व 
 भाग 4 (A )
 अनुच्छेद 51 (क)            मौलिक कर्तव्य 
भाग 5 
अनुच्छेद 52-73             भारत के राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति का संगठन व कार्यक्षेत्र 
अनुच्छेद 79                   संसद का गठन 
अनुच्छेद 80                   राजयसभा का गठन 
अनुच्छेद 81                  लोकसभा का गठन 
अनुच्छेद 123               अध्यादेश जारी करने का अधिकार (राष्ट्रपति)
अनुच्छेद 124               सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना 
भाग 6 
अनुच्छेद 125-162        राजयपाल की नियुक्ति व अधिकार 
अनुच्छेद 163-164          राज्य की मंत्रिपरिषद 
भाग 9 
अनुच्छेद 243-243(ण)   पंचायतीराज का गठन व् इसके अन्य उपबन्ध 
भाग 9(क)
अनुच्छेद 243(ट ) से       नगरपालिका व इसके अन्य उपबंध  
243(यछ:)  
भाग 11
अनुच्छेद 248               अवशिष्ट विधायी शक्तिया 
भाग 12 
अनुच्छेद  266              भारत और राज्यों की संचित निधिया 
अनुच्छेद 267               आकस्मिक निधिया 
अनुच्छेद 280              वित्त आयोग का गठन 
 अनुच्छेद  281            वित्त आयोग के गठन की सिफारिश 
भाग 14 
 अनुच्छेद  312             अखिल भारतीय सेवाए 
 अनुच्छेद  315           संघ  एवं रज्य लोकसेवा आयोग का गठन 
 अनुच्छेद  320           संघ लोक सेवा आयोग के कार्य 
भाग 15 
 अनुच्छेद  324           भारत का निर्वाचन आयोग 
भाग 16 
 अनुच्छेद  330         लोकसभा में अनुसूचित जाती और जनजाति के लिए आरक्षण 
 अनुच्छेद  331           लोकसभा में आंग्ल भारतीय समुदाय का प्रतिनिधित्व 
 अनुच्छेद  332         राज्य विधानसभा में अनुसूचित जाती व जनजाति के लिए आरक्षण 
 अनुच्छेद  333        राज्य विधानसभा में आंग्ल भारतीय  समुदाय का प्रतिनिधत्व 
भाग 17 
 अनुच्छेद  343-351     संघ की भाषा प्रादेशिक भाषाओ उच्चतम एवं उच्च न्यायालयों की                                         
                                                 भाषा के सम्बन्ध में प्रावधान  
भाग 18 
   अनुच्छेद  352-360        आपातकालीन उपबन्ध 
भाग 19 
  अनुच्छेद  368           संविधान में संशोधन करने की संसद की शक्ति व प्रक्रिया 
भाग 20 
  अनुच्छेद  370            जम्मू-कश्मीर राज्य के सम्बन्ध में अस्थायी उपबन्ध 




भारतीय संविधान की अनुसूचियाँ




प्रथम अनुसूची भारतीय संघ के राज्यो (29) व संघ शासित (7 )




द्वितीय अनुसूची भारतीय राज्यव्यवस्था, पदाधिकारीओ को प्राप्त वेतन, पेंशन, भत्ते आदि




तृतीय अनुसूची पदाधिकारियों द्वारा शपत ग्रहण




चौथी अनुसूची राज्यों तथा संघियो क्षेत्रों की राजयसभा में प्रतिनिधित्व का विवरण




पांचवी अनुसूची अनुसूचित जाती/जनजाति के प्रशासन व नियंत्रण का उल्लेख




छठी अनुसूचियाँ असम, मेघलय, त्रिपुरा और मिजोरम के जनजाति के क्षेत्रों में प्रशासन का उल्लेख




सातवीं अनुसूची केन्द्र व राज्यों में शक्ति के बटवारे, इसके अन्तर्गत तीन सूचियाँ है, संघ सूची, राज्य सूची, व समवर्ती सूची




                        संघ सूची         संविधान के लागु होने के समय 97 विषय थे वर्तमान में इसमे
                                                98   विषय है आयुध, समाचार पत्रों के क्रय-विक्रय तथा उन
                                                उनके विज्ञापन पर कर 
                        राज्य सूची           संविधान के लागु होने समय इसके 66विषय थे, वर्तमान 
                                                  में 62 विषय   है 
                         समवर्ती सूची     संविधान के लागु होने के समय समवर्ती में 47 विषय थे , 
                                                 वर्तमान समय में 52 विषय है दण्डविधि, विवाह व विवाह विच्छेद , 
वन, शिक्षा विधि वृति, चिकित्सा, जनसंख्या नियंत्रण एवं परिवार नियोजन,
 जन्म एवं मृत्यु का पंजीकरण, बाट और माप, विद्युत आदि 
                                  








आठवीं अनुसूची इसमें भारत की 22 भाषाओ का उल्लेख है




नौवीं अनुसूची संविधान में यह अनुसूची प्रथम संविधान संशोधन अधिनियम 1951 द्वारा जोड़ी गई |




इसमें राज्य द्वारा संपत्ति के अधिग्रहण की विधियो का उल्लेख है




दसवीं अनुसूची 52 वें संविधान संशोधन 1985 द्वारा जोड़ी गई,दलबदल से संबन्धित प्रावधान




ग्यारहवीं अनुसूची यह अनुसूची संविधान में 73 वें संवैधानिक (1993) द्वारा जोड़ी गई,




इसमें पंचायती राज संस्थाओ को कार्य करने के लिए 29 विषय दिए




बारहवीं अनुसूची यह अनिसुची संविधान में 74 वें संवैधानिक संशोधन (1993 )द्वारा जोड़ी गई ,




इसमें शहरी क्षेत्र की स्थानीय स्वशासन संस्थाओ को कार्य करने के लिए 18 विषय दिए