मंगलवार, 6 अगस्त 2019

राज्य नीति निर्देशक तत्व व नागरिकता एक नजर

राज्य नीति निर्देशक तत्व 

  • भारतीय संविधान के भाग 4 के अनुच्छेद 36-51 में राज्य के लिए नीति निर्देशक करने वाले तत्वों का उल्लेख किया गया है | 
  • राज्य नीति निर्देशक तत्व की संकल्पना आयरलैण्ड के संविधान से प्रेरित है 
  • अनुच्छेद 38  -लोककल्याण की अभिवृद्धि,सामाजिक व्यवस्था बनाना, सामाजिक, आर्थिक एवं राजनैतिक न्याय प्रदान करता है 
  • अनुच्छेद 40  -ग्राम पंचायत की स्थापना | 
  • अनुच्छेद 42 कामगारों को निर्वाह मजदूरी| 
  • अनुच्छेद 44  - समान सिविल संहिता का निर्माण करे | 
  • अनुच्छेद 45  6 वर्ष की आयु को नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा के अवसर उपलब्ध करवाना है 
  • अनुच्छेद 46  -अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति और अन्य दुर्बल वर्ग को शिक्षित करना, आर्थिक अभिवृद्धि करना राज्य का कर्तव्य है|   
  • अनुच्छेद 48(क) -पर्यावरण का सरक्षण  तथा संवर्द्धन और वन तथा वन्य जीवो की रक्षा | 
  • अनुच्छेद 49  -राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों, स्थानों  व वस्तुओ का सरक्षण | 
  • अनुच्छेद 50  -कार्यपालिका व न्यायपालिका के कार्य क्षेत्र को अलग करता है| 
  • अनुच्छेद 51  -अन्तराष्ट्रीय शान्ति व सुरक्षा बनाए रखने का प्रयत्न करना 
नागरिकता 

  • भारतीय संविधान संघात्मक है | 
  • भारतीय नागरिको को एकल नागरिकता प्राप्त है | 
  • भारतीय नागरिकता, 1955 में नागरिकता प्राप्त हेतु प्रावधान किया गया है 
  • जन्म आधारित -जन्म भारत में 26 जनवरी 1950 के बाद हुआ हो, वह जन्म से भारत का नागरिक होगा | 
  • वंशानुगत अथवा रक्त सम्बन्ध आधरित - जन्म 26 जनवरी 1950 के बाद भारत के बाहर हुआ हो लेकिन जन्म के समय उसका पिता भारत का नागरिक हो, वह भारत का नागरिक होगा| 
  • 1986  में भारतीय नकृक्त अधिनियम, 1956 में संशोधन किया गया है |                                             कोई भी व्यक्ति अब देशीयकरण द्वारा नागरिकता तभी प्राप्त कर सकता है, जब वह कम से कम 10 वर्ष (पहले 5 वर्ष थी) तक भारत में निवास कर चूका हो | 
  • पंजीकरण के माध्यम से जो व्यक्ति भारतीय नागरिकता प्राप्त करना चाहता है,उन्हें अब भारत में कम से कम 5 वर्ष (पूर्व में 6 माह की थी) निवास करना होगा | 

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