शनिवार, 10 अगस्त 2019

संघवाद : केंद्र राज्य संबंध Federalism एक नजर

संघवाद 
  • Federation शब्द लैटिन भाषा के फोड़ाईस  (Foedus) से बना है जिसका अर्थ है संधि या  समझौता
  • भारतीय संविधान में Federation शब्द का उल्लेख न कर 'राज्यों का संघ' (Union of states) वाक्यांश का उल्लेख किया गया है 
  •          भारतीय संघ, राज्यों के "पारम्परिक समझौते " का परिणाम नहीं है 
  •          किसी भी राज्य को संघ से अलग होने का अधिकार नहीं है 
  • भारतीय संघीय व्यवस्था का स्वरूप - प्रो. एलेक्जेंड्रोविच- सच्चा संघ, के. सी. व्हीयर - अर्द्ध संघ, मौरिस जोन्स - सौदेबाजी 
  • ए. एच. बिर्च एवम ग्रेनविल आस्टिन- सहयोगी संघवाद, प्रो.पायली 'संविधान का ढांचा संघात्मक, किन्तु उसकी आत्मा एकात्मक । भारतीय संघीय व्यवस्था कनाडा से प्रभावित हैhttps://www.gkvidya.site/2019/08/sanghvad.kendra.rajya-sambandh.html
     
भारत मे सहयोगी संघवाद
  • सर्वप्रथम ए एच बिर्च ने अपनी पुस्तक 'फेडरेलिज फाइनेंस एंड सोशल लेजिसलेशन' में एक प्रतियोगी तथा सहयोगी संघवाद की संकल्पना प्रस्तुत की ओर भारतीय संघ को सहयोगी संघवाद की संज्ञा दी है 
  • सहयोगी संघवाद से तात्पर्य है कि भारत का संविधान केंद्र एवं राज्यो के परस्पर सहयोग पर बल देता है 
  • भारत की राजनीतिक प्रणाली को सहयोगी संघ का स्वरूप प्रदान करने में संवैधानिक संस्थाओं द्वारा सहयोग ।
  •     1. योजना आयोग एवम राष्ट्रीय विकास परिषद 
  •     2. वित्त आयोग
  •     3. अन्तर्राज्यीय परिषद 
  •     4. क्षेत्रीय परिषद 
  •     5. अखिल भारतीय सेवाए
  •     6. विश्व विद्यालय अनुदान आयोग 
  •     7. विभिन्न सम्मेलन (जैसे मुख्यमंत्री, वित्त मंत्री, कृषि मंत्री सम्मलेन)
केन्द्र राज्य सम्बन्ध
  • संविधान के भाग 11 में अनुच्छेद 245 से 263 तक केंद्र- राज्य सम्बन्धों की चर्चा की गई है 
  • संविधान के आधार पर केन्द्र राज्य सम्बन्धो को तीन भागों में विभाजित किया है 
  • 1. विधायी सम्बन्ध (अनुच्छेद 245 से 255)
  • 2. प्रशासनिक सम्बन्ध ( अनुच्छेद 256 से 263)
  • 3. वित्तीय सम्बन्ध ( अनुच्छेद 268 से 293)
विधायी सम्बन्ध
  • भाग 11 में अनुच्छेद 245 से 255 केन्द्र ओर राज्य के बीच विधायी सम्बन्धो के विभिन्न पहलुओं का आदान-प्रदान किया जाता है 
  • केन्द्र राज्यो के विधायी सम्बन्धो का संचालन तीन सूचियों के आधार पर होता है  संघ सूची, राज्य सूची, समवर्ती सूची । इन सूचियों को 7 अनुसूची में रखा गया है 
  • संघ सूची - वर्तमान में  इस सूची में 100 विषय शामिल है, विदेशी मामले , रक्षा, रेलवे, डाक सेवा, बैकिंग, परमाणु ऊर्जा, संचार, मुद्र आदि विषय 
  • राज्य सूची - वर्तमान में राज्य सूची के अन्तर्गत 61 विषय शामिल है, पुलिस, सार्वजनिक व्यवस्था, परिवहन, स्वास्थ्य, कृषि, स्थानीय सरकार,पेयजल की सुविधा, साफ-सफाई आदि 
  • समवर्ती सूची - वर्तमान में 52 विषय शामिल है, शिक्षा, वन, जंगली जानवर, और पक्षियों की रक्षा,बीजली, श्रम कल्याण, आपराधिक कानून और प्रक्रिया, सिविल प्रक्रिया जनसंख्या नियंत्रण और परिवार नियोजन, दवा आदि 
  • अनुच्छेद 245 - अपनी कार्यकारी शक्तियों के प्रयोग से सम्बंधित कुछ मामलो में राज्यों को दिशा-निर्देश देने के लिए केंद्र को शक्तिया प्रदान करता है 
  • अनुच्छेद 249 - राष्ट्रीय हित में राज्य सूचि में एक विषय के सम्बन्ध में कानून बनाने के लिए संसद को शक्तिया प्रदान करता है 
  • अनुच्छेद 250  - के तहत संसद जब राष्ट्रीय आपात स्थिति (अनुच्छेद 352 ) होती है तो संसद के हाथो में राज्य से सम्बंधित मामलो पर कानून बनाने की शक्तिया आ जाती है 
प्रशासनिक सम्बन्ध 
  • अनुच्छेद 256से 263 का सम्बन्ध केंद्र और राज्य के बीच प्रशासनिक सम्बन्धो के आदान प्रदान से है 
  • NOTE :  अनुच्छेद 73 - केंद्र की प्रशासनिक शक्ति का विस्तार उन विषयो तक है, जिन पर संसद को कानून बनाने का अधिकार है 
  • अनुच्छेद 162 - राज्यों की प्रशासनिक शक्ति का विस्तार उन विषयो तक है, जिन पर संससद को कानून बनाने का अधिकार है 
राज्यों पर केंद्र के प्रशसकीय नियंत्रण की विधिया 
  • अनुच्छेद 256  - केंद्र राज्यों को यह निर्देश  सकता है की उन्हें अपनी प्रशानिक शक्ति का प्रयोग किस प्रकार करना चाहिए 
  • अनुच्छेद 257 - राज्यों को अपनी  प्रशासनिक शक्ति का प्रयोग इस प्रकार करना है संसद द्वारा निर्मित कानूनों का पालन होता है 
  • अनुच्छेद 258 - राष्ट्रपति राज्यों की सरकारों अथवा उसके पदाधिकारियों को ' एजेंट के रूप में कोई भी कृत्य सोप सकता है 
  • अनुच्छेद 261 - यदि केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों का यह कर्तव्य कि वे सभी सरकारी कृत्यों का आदर करे एवं न्यायालयों के निर्देश को लागु करे 
  • NOTE : अनुच्छेद 365 - यदि केंद्र के निर्देशों का पालन राज्य नहीं करता है तो संवैधानिक तंत्र की विफलता के आधार पर उस राज्य में राष्ट्रपति शासन लागु किया जाता है 
  • अखिल भारतीय सेवाओं एवं राजयपाल के माध्यम से भी केंद्र राज्यों पर नियंत्रण रखता है 
केंद्र की राज्यों के बीच समन्वयकर्ता की भूमिका 
  • अनुच्छेद 262 - संसद अन्तर्राज्यीय नदियों के बटवारे से उत्पन्न विवादों को सुलझाने के लिए कानून बना सकती है 
  • अनुच्छेद 263 - राष्ट्रपति राज्यों  पारस्परिक विवादों की जाँच एवं समाधान के लिए अन्तर्राज्यीय परिषद का गठन कर सकता है (स्थापना 28 मई 1990 )
वित्तीय सम्बन्ध 
  • संविधान के भाग 12  में अनुच्छेद 268से 293 तक केंद्र और राज्य वित्तीय सम्बन्धो की चर्चा की गई है 
  • केंद्र सरकार के प्रमुख राजस्व स्रोत - निगम कर, सीमा शुल्क, निर्यात शुल्क, कृषि भूमि को छोड़कर अन्य सम्पत्ति पर सम्पदा शुल्क, विदेशी ऋण, रेल, रिजर्वबैंक, शेयर बाजार, आदि 
  • राज्यों के राजस्व - प्रति व्यक्ति कर, कृषि भूमि कर, बीजली के उपयोग एवं विक्रय पर कर आदि 
  • केंद्र द्वारा लगाए गए, वसूले गए विनियोजित कर - निगम कर 
  • केंद्र द्वारा लगाए, वसूले गए किन्तु राज्यों को सौंपे जाने वाले कर -  वस्तुओ के क्रय विक्रय पर कर, रेल किराया तथा भाड़ो पर कर 
  • केंद्र द्वारा लगाए किन्तु राज्य द्वारा वसूले गए एवं विनियोजित कर- स्टाम्प शुल्क 
  • केंद्र द्वारा लगाया गए, वसूले गए तथा केंद्र राज्यों के बीच वितर्क किया जाने वाला कर - आय कर 
  • NOTE : अनुच्छेद 280 - अर्द्ध न्यायिक निकाय के रूप में वित्त आयोग की व्यवस्था करता है, इसका गठन हर 5 वर्ष में राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है 
  • 14 वें वित्त आयोग के अध्यक्ष वाई वी रेड्ड़ी है 
  • 15 वें वित्त आयोग के अध्यक्ष एन के सिंह है 
केंद्र राज्य सम्बन्धो में सुधार हेतु प्रयास 
  • प्रशासनिक सुधार आयोग - केंद्र सरकार ने मोरारजी देसाई की अध्यक्षता में 1966 में प्रशासनिक सुधार आयोग (एआर सी ) का गठन किया, 22 सिफारिशें है ांविधान के अनुच्छेद 263  के तहत एक अंतराज्यीय परिषद का गठन किया जाए 
  • राजमन्नार समिति - इस समिति ने 1971 में तमिलनाडु सरकार को अपना प्रतिवेदन सौंपा , सिफारिश, अखिल भारतीय सेवाओं को समाप्त कर दिया जाए 
  • सरकारिया आयोग - 1983 में केंद्र सरकार ने उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत न्यायाधीश आर. एस. सरकारिया की अध्यक्षता में केंद्र राज्य सम्बन्धो पर तीन सदस्यीय आयोग का गठन किया गया ,आयोग ने अंतिम रिपोर्ट अक्टूबर 1987  में पेश की 
  • एक स्थायी अंतर्राज्यीय परिषद हो जिसे अंतर् सरकारी परिषद कहा जाना चाहिए। इसकी स्थापना अनुच्छेद 263  के तहत होनी चाहिए 
  • अनुच्छेद 356(राष्ट्रपति शासन) को बहुत संभलकर इस्तेमाल किया जाए 
  • योजना आयोग और वित्त आयोग के बीच कार्यो का वर्तमान बटवारा उचित व निरंतर होना चाहिए 
  • त्रिभाषा फॉर्मूला समान रूप से लागु करने की डिश में कदम उठाना चाहिए 

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